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गांजा पीने के नियम

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🔱गांजा पीने के नियम🔱
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इस लेख के माध्यम से मैं आपको गांजे के सेवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें और नियम बताने वाला हूं। आशा है कि इस लेख को पढ़ कर आप गांजे के सेवन से जुड़ी उन भूलों में सुधार करेंगे जिन्हें आजतक आप करते आए हैं। 



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☑️ गांजा कब और कितना पीना चाहिए?


✓सूर्योदय के पूर्व

• प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शौच-स्नान इत्यादि कार्यों से निवृत्त होकर शिव जी की आराधना करके 2-3 सांस भर पर्याप्त है।

✓सूर्यास्त के पश्चात

•संध्या वंदन के पश्चात २-३ सांस भर पर्याप्त है।

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☑️अन्य महत्वपूर्ण नियम

•गांजा सदैव सात्विक विचारों के साथ ही ग्रहण करें।
•गांजा पीने वाला व्यक्ति मांस-मदिरा का त्याग करें।
•गांजा ऋग्वेद में पांच महान औषधियों में एक कहा गया है इसका दुरुपयोग कभी ना करें।

•गांजे का धूम्रपान करते हुए मंत्र इत्यादि पढ़े अथवा सुने।

•गांजा शुद्ध व पवित्र स्थान पर ही ग्रहण करें।
•गांजा पीने के लिए मिट्टी की चिलम का ही उपयोग करें।
•चिलम को नियमित स्वच्छ रखें तथा पवित्र स्थान पर रखें।
•चिलम कुम्हार से ही खरीदे जिससे उसका जीवनयापन हो सके।
•नई चिलम सोमवार के दिन शिव जी की आराधना करके ही उपयोग करें। 
•पुरानी अथवा खंडित चिलम निकट जलाशय में प्रवाह कर दें या मिट्टी में गाड़ दें जिसपर कोई चढ़े नहीं।
•आजकल बाजार में Bong, Blunt, Vape, Joint इत्यादि के रूप में भी गांजा पिया जाता है जो पूर्णतः गांजे का तिरस्कार है, ऐसा भूल से भी ना करें।
•गांजे के बीजों को जमा करने के पश्चात किसी बंजर भूमि में बो दे जिससे वह भूमि भी उपजाऊ हो जाए और आप प्रकृति के प्रति अपना पुत्रधर्म निभा सकेंं।
•यदि आपके द्वारा बोए गए बीजों से किसी एक पौधे का भी सृजन होता है तो यह पुण्य आपके सर्वकल्याण में जुड़ेगा।
•गांजे का एक पौधा अपनी अद्वितीय क्षमताओं के कारण पूरी सृष्टि के लिए वरदान हो सकता है।
•गांजे के बने उत्पादों का अधिक से अधिक उपयोग करें जिससे प्रकृति का बिगड़ा संतुलन स्थिर हो।

आभार: Roshan Narnoli.✍🏻

लेखक, गांजा शोधकर्ता

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By ROSHAN NARNOLI,

Cannabis activist, Researcher, Educator and Blogger.



Copyright © 2020

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